एक दोस्त ने कहा,
रात में सोने से पहले सोचना
उसको क्या पता
की अगर मैं सोचने लग गयी
तो सोचने में सुबह हो जाएगी
मन न जाने कहाँ कहाँ भटकने लगेगा
जिन गलियों को भूल चुकी हूँ
उन गलियों की सैर कराएगा
याद आएगी वो नाकाम मुहब्बत
जो मैंने शिद्दत से निभाई थी
लेकिन उसको रास न आई
क्योंकि उसको दुनिया प्यारी थी
प्यार नहीं
मन ये भी याद दिलाएगा
की छले जाने का एहसास कितनी टीस देता है
ज़िंदा होते हुए भी ज़िंदा न होने का आभास होता है
सांस चलती है
लेकिन जीवन मर जाता है
ये टीस वो क्या समझे,
वो क्या जाने
उसको तो दुनिया में कुछ बनना था
नाम कमाना था
प्यार निभाने का वक़्त कहाँ था?
सोचती रही तो सो नहीं पाऊँगी
लेकिन सो भी गयी तो
क्या नींद आएगी?
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