Thursday, July 28, 2011

छोटी छोटी बूंदे

बरसात की झड़ी में
एक छोटी सी बूँद
तन को छूती हुई
मन को भिगो गई

उस एक बूँद में मैंने
मन को सराबोर पाया
मन इतना गीला हो गया
की निचोड़ने से सैलाब आ गया
और आँखों से बह निकला

एक बूँद ने जो दिया था
उस से कई गुना ज्यादा
मैंने बरसात को दे दिया...

2 comments:

  1. So beautiful ...the last line especially.
    Chemmalar Shanmugam

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  2. http://www.chemmalar.blogspot.com/
    My blogspot

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