बरसात की झड़ी में
एक छोटी सी बूँद
तन को छूती हुई
मन को भिगो गई
उस एक बूँद में मैंने
मन को सराबोर पाया
मन इतना गीला हो गया
की निचोड़ने से सैलाब आ गया
और आँखों से बह निकला
एक बूँद ने जो दिया था
उस से कई गुना ज्यादा
मैंने बरसात को दे दिया...
एक छोटी सी बूँद
तन को छूती हुई
मन को भिगो गई
उस एक बूँद में मैंने
मन को सराबोर पाया
मन इतना गीला हो गया
की निचोड़ने से सैलाब आ गया
और आँखों से बह निकला
एक बूँद ने जो दिया था
उस से कई गुना ज्यादा
मैंने बरसात को दे दिया...
So beautiful ...the last line especially.
ReplyDeleteChemmalar Shanmugam
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